योग द्वारा गर्मियों में रखें स्वयं को शीतल, बीमारियां और लू को रखें दूर

गर्मियों की शुरुआत हो चुकी है। बारिश और ठंड की बजाय गर्मियों का मौसम सभी के लिये ज्यादा कठिन होती है। गर्मी की तपन और चुभन व लू से होने वाली बीमारियों से बचने के लिए योग सबसे अच्छा उपाय हैं। ऐसी ही एक योगिक क्रिया है शीतली प्राणायाम। शीतली एक ऐसी क्रिया है, जिसे करने में मात्र 5 से 7 मिनिट लगते हैं तथा इसके करने से गर्मी में भारी राहत मिलती है। यह क्रिया है-शीतली प्राणायाम और शीतकारी प्राणाया,
शीतली प्राणायाम:
शीतली प्राणायाम करने से शरीर को ठंडक मिलती है, इसीलिए इस प्राणायाम को Cooling Breath भी कहा जाता हैं। इस प्राणायाम को अक्सर अन्य योगासन या प्राणायाम के बाद में किया जाता हैं। शीतली प्राणायाम एक बेहद सरल और उपयोगी प्राणायाम हैं।
शीतली प्राणायाम करने की विधि :
एक समान, सपाट और स्वच्छ जगह जहा पर स्वच्छ हवा मिलती हो ऐसे स्थान पर एक कपडा(आसन) बिछाकर बैठ जाएं।
आपको जो आसन आसान लगे उस आसन में बैठ जाए। (सुखासन, सिद्धासन या पद्मासन)
अब अपनी जीभ को बाहर निकालकर उसे एक नली (Pipe) के सदृश्य बना लें।
अब इस नली के माध्यम से गहरी श्वास खींचकर उदर / पेट को वायु से भर दें।
जीभ को अंदर खींच ले तथा मुंह को बंद कर लें।
इसके उपरांत गर्दन को आगे की ओर झुकाकर अपने जबड़े के अगले हिस्से को छाती से लगा लें (जालंधर बंध)।
अब क्षणभर कुंभक (श्वास को रोकना) करे।
अब जालंधर बंध को निकालकर गर्दन सीधी करे। 
इसके बाद नासिका (नाक) से श्वास को बाहर निकाल दें। श्वास बाहर निकालने का समय अंतराल श्वास अंदर लेने के समय अंतराल से थोड़ा ज्यादा होना चाहिए।
यह एक आवृत्ति हैं। इसी प्रकार आप अपने क्षमता और समयानुसार 9 से 49 आवृत्तियाँ तक कर सकते हैं।
शितकारी प्राणायाम
'शितकारी' का अर्थ होता हैं - ऐसी चीज जो ठंडक पहुचाती हैं। यह प्राणायाम करने से शरीर और मन को ठंडक पहुचती हैं और इसी लिए इसे 'शितकारी प्राणायाम' कहा जाता हैं। शितली प्राणायाम की तरह, यह प्राणायाम भी बेहद सरल और उपयोगी प्राणायाम हैं।
शितकारी प्राणायाम की विधि
एक स्वच्छ, समान और सपाट जगह जहा पर स्वच्छ और प्रदुषणरहित हवा मिलती हो ऐसे स्थान पर एक कपडा बिछाकर बैठ जाए।
आप अपने हिसाब से जो आसान आपको आरामदायक लगे उस आसन में बैठ जाए।
मेरुदंड, गला तथा सिर को सीधा रखे।
ऊपर और निचे के दातों को परस्पर मिलाकर रखे।
जीभ को पीछे की ओर मोड़कर तालू से जीभ के अग्र भाग को लगा लें (खेचरी मुद्रा)।
अब दातों के बिच की जगह से श्वास धीरे-धीरे अन्दर लें।
श्वास अन्दर लेते समय 'सीsss ' की आवाज करें।
अब श्वास को अन्दर रख जालंदर बंद लगा दे। (सिर को आगे की ओर झुकाकर जबड़े के आगे के हिस्से को छाती को लगाकर रखना)
कुछ क्षणों बाद जालंदर बंद को मुक्त कर धीरे-धीरे दोनों नासिका से श्वास बाहार निकाले। (रेचक)
यह एक आवृत्ति हैं। इसी तरह आप अपने क्षमता और समय अनुसार 9 आवृत्ति से 49 आवृत्ति तक कर सकते हैं।
शीतली एवं शीतकारी प्राणायाम से होने वाले विविध लाभ
शारीरिक गर्मी को कम करता हैं।
मानसिक और भावनात्मक उत्तेजनाओं को कम करता हैं।
इसे रात्रि में निद्रा के पूर्व करने से अच्छी शांत नींद आती हैं।
प्यास को कम करता हैं।
भूख को कम करता हैं।
गर्मी के दिनों में शरीर को ठंडक पहुचाने में सहायक हैं।
रक्तचाप को कम करने में सहायक हैं।
Acidity / अम्लपित्त और पेट के ulcer को कम करता हैं।
हृदयरोग में उपयोगी हैं।
पाचन को ठीक करता हैं।
निम्नलिखित व्यक्तिओ ने शीतली प्राणायाम नहीं करना चाहिए
दमा / Asthma से पीड़ित व्यक्तिओ को नहीं करना चाहिए।
जुकाम से पीड़ित व्यक्तिओ को नहीं करना चाहिए।
अगर आपका रक्तचाप / Blood Pressure कम रहता है (< 90 / 60 mmHg) तो यह प्राणायाम नहीं करना चाहिए।
ठण्ड के मौसम में यह प्राणायाम कम करना चाहिए।
शीतली प्राणायाम बेहद आसान और उपयोगी प्राणायाम हैं। अगर यह प्राणायाम करते समय आपको कोई कठिनाई होती हैं तो योगप्रशिक्षक की सलाह लेना चाहिए।



इस जानकारी की सटिकता, समयबद्धता और वास्‍तविकता सुनिश्‍चित करने का सिर्फ प्रयास किया गया है । हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्‍सक से अवश्‍य संपर्क करें। हमारा उद्देश्‍य आपको रोचक और ज्ञानवर्धक जानकारी मुहैया कराना मात्र है। आपका चिकित्‍सक आपकी सेहत के बारे में बेहतर जानता है और उसकी सलाह का कोई विकल्‍प नहीं है।हमारी जानकारी-आपका विचार.आपकी मार्गदर्शन की आवश्यकता है, आपकी टिप्पणियाँ उत्साहवर्धन करती है.


यह जरुर पढे- यह जानकारी आपको उपयोग करने से पहेले डाक्टरसाहब की सलाह लेनी चाहिए बिना डाक्टरसाहब की सलाह यह जानकारी आप पर गलत हो सकती है हरेक का शरीर अलग-अलग एलर्जी वाला होता है

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