ऑस्टियोपोरोसिस रोग क्या है।

विश्व ऑस्टियोपोरोसिस दिवस( 20 अक्टूबर)
ऑस्टियोपोरोसिस है क्या?


बचपन में 20 साल की उम्र तक नई हड्डी बनने की रफ्तार ज्यादा होती है व पुरानी हड्डी गलने की कम होती है। फलस्वरूप हड्डियों का घनत्व ज्यादा होता है और वे मजबूत होती हैं। तीस साल की उम्र तक आते-आते हड्डियों का गलना (क्षीण होना) बढ़ने लगता है व नई हड्डी बनने की रफ्तार कम होने लगती है। यह बढ़ती उम्र की नियमित प्रक्रिया है।
ऑस्टियोपोरोसिस शब्द ग्रीक एवं लैटिन भाषा है। 'ऑस्टियो' का मतलब हड्डी व 'पोरोसिस' का मतलब छिद्रों से भरा हुआ। हड्डी एक जीवित अंग है, जीवन भर पुरानी हड्डी गलती जाती है व नई बनती जाती है। जब कई कारणों से गलन की रफ्तार अधिक हो जाए तो ऑस्टियोपोरोसिस या अस्थिभंगुरता हो जाती है। इस बीमारी में हड्डियों का घनत्व (लंबाई, मोटाई, चौड़ाई) कम हो जाता है।
कैल्शियम की कमी से हड्डियाँ कमजोर और खोखली हो जाती हैं, जिससे शरीर आगे की ओर झुकता है व मामूली चोट से हड्डियों के फ्रेक्चर की आशंका बढ़ जाती है। पुरुषों के मुकाबले स्त्रियों में यह समस्या 4 गुना ज्यादा होती है। 50 वर्ष के बाद कूल्हे एवं रीढ़ की हड्डी के फ्रेक्चर की आशंका 54 प्रतिशत बढ़ जाती है व 20 प्रतिशत मृत्यु दर बढ़ जाती है।
इसकी शुरुआत में छोटे-छोटे क्रेक फ्रेक्चर होने से रीढ़ की हड्डी के मनके जुड़कर ऊँचाई कम लगने लगती है। कभी-कभी शरीर आगे की ओर झुकता है व कूबड़ निकलने लगता है। चलने की गति कम हो जाती है। जमीन पर पकड़ कम होने लगती है। बैलेंस बिगड़ने से गिरने की आशंका बढ़ जाती है।
हिन्दुस्तान में हर 2 में से 1 स्त्री जो 45 वर्ष पार है, वह ऑस्टियोपोरोसिस से पीड़ित है। यदि आपकी उम्र 40 से ज्यादा है, यदि आप रजोनिवृत्त महिला हैं, यदि आपके जोड़ों में दर्द रहता है। हड्डियों में कमजोरी महसूस होती है। अधिक धूम्रपान करते हैं, तो आप ऑस्टियोपोरोसिस से ग्रस्त हो सकते हैं।
न ऑस्टियोपोरोसिस! मुझे!! कैसे!!!, सुनकर हर इंसान चौंकता है? स्वास्थ्य के बारे में पूरी सावधानी रखने वाली स्त्री भी सोच में पड़ गई होगी कि यह मुझे कैसे हो सकता है? परंतु... ऑस्टियोपोरोसिस यानी अस्थिभंगुरता एक छुपा चोर है, जो दबे पाँव आता है और पूरे शरीर को खोखला कर देता है।



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यह जरुर पढे- यह जानकारी आपको उपयोग करने से पहेले डाक्टरसाहब की सलाह लेनी चाहिए बिना डाक्टरसाहब की सलाह यह जानकारी आप पर गलत हो सकती है हरेक का शरीर अलग-अलग एलर्जी वाला होता है

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